चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा किसानों को शांतिपूर्ण कैंडल मार्च करने से रोकने का प्रयास; किसानों ने बाधाओं के बावजूद किया मार्च

संवाददाता पवन कुमार गुप्ता 
नई दिल्ली 

चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा किसानों को शांतिपूर्ण कैंडल मार्च करने से रोकने का प्रयास; किसानों ने बाधाओं के बावजूद किया मार्च

लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों और पत्रकार को श्रद्धांजलि अर्पित; मुख्य आरोपियों को अदालत के माध्यम से जल्द सजा देने की मांग

चंडीगढ़, 3 अक्टूबर: किसान मज़दूर मोर्चा चैप्टर पंजाब और हरियाणा की ओर से आज किसान भवन, चंडीगढ़ में एकत्र होकर लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों और पत्रकार को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए किसान भवन से मटका चौक तक कैंडल मार्च करने का कार्यक्रम रखा गया था। इस अवसर पर चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करके बड़े स्तर पर बैरिकेडिंग की गई थी। किसानों को किसान भवन पहुंचने के दौरान भी कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन किसान इन बाधाओं को पार करते हुए किसान भवन पहुंचे। इस अवसर पर लगभग 800 से 1,000 किसान एकत्र हुए।
किसान नेताओं ने प्रशासन के साथ बातचीत करते हुए कहा कि किसान शांतिपूर्ण ढंग से मोमबत्तियां लेकर सड़क के एक तरफ से मटका चौक तक कैंडल मार्च करना चाहते हैं। इससे कानून-व्यवस्था या यातायात में कोई बाधा नहीं आएगी। किसान नेताओं द्वारा दी गई इन दलीलों का प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से केवल 11 किसानों को ही कैंडल मार्च करने की अनुमति देने की पेशकश की गई, जिसे किसानों ने स्वीकार नहीं किया। किसान नेताओं ने प्रशासन से साइकिल ट्रैक वाली तरफ से मार्च करने की अनुमति देने की मांग की, लेकिन प्रशासन इसके लिए भी सहमत नहीं हुआ।

इसके बाद किसान नेताओं ने फैसला करते हुए निर्धारित मार्ग के बजाय जे. डब्ल्यू. मैरियट चौक की ओर मोमबत्ती मार्च शुरू कर दिया। जब किसानों ने सेक्टर-22 की मार्केट की ओर मार्च करने का प्रयास किया तो पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग की गई और किसानों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। पुलिस द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद किसानों ने सेक्टर-22 की मार्केट में शांतिपूर्ण ढंग से अपना मार्च किया और बाद में इसे समाप्त कर दिया। इस दौरान किसान भवन के सामने भी बड़ी संख्या में किसानों ने मोमबत्तियां जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह का राज लाने के दावे कर रही है, लेकिन दूसरी ओर पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में किसानों को शांतिपूर्ण ढंग से कैंडल मार्च भी नहीं करने दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो क्या किसानों और आम लोगों की आवाज़ को इसी तरह दबाया जाएगा? उन्होंने कहा कि यह फैसला पंजाब के लोगों को करना है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने की स्वतंत्रता को किस तरह देखते हैं।

किसान नेताओं ने मांग की कि 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने के मामले में मुख्य आरोपी पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके पुत्र आशीष मिश्रा टेनी के खिलाफ अदालत की कार्रवाई तेज करके कानून के अनुसार जल्द सजा सुनाई जाए। इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हुई थी। किसान नेताओं ने कहा कि घटना के समय बनाई गई वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और तेज़ सुनवाई होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि पिछले सितंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को अपना सरकारी वकील बदलने के लिए कहा गया था। किसान नेताओं ने इस मामले में सरकारी पक्ष की पैरवी पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहीद किसानों और पत्रकार के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सरकार को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

किसान नेताओं ने यह भी कहा कि लखीमपुर खीरी की घटना में शहीद हुए किसानों और घायल हुए लोगों के परिवारों के साथ किए गए मुआवज़े और सरकारी नौकरियों के वादे अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि घायलों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवज़ा और वादे के अनुसार सरकारी नौकरियां तुरंत दी जाएं।

अंत में किसान मज़दूर मोर्चे ने घोषणा की कि पंजाब सरकार को किसानों-मज़दूरों की मानी गई मांगों को लागू करने के लिए 17 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि भगवंत मान सरकार द्वारा निर्धारित समय तक मांगों को लागू नहीं किया गया तो 17 अक्टूबर को अगले बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

इस अवसर पर सरवण सिंह पंधेर, रणबीर सिंह राणा, किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब, बलदेव सिंह जीरा, गुरनाम सिंह ढैंठल (बी.के.यू. क्रांतिकारी), अमरजीत सिंह मोहरी, जै सिंह जलवेड़ा (बी.के.यू. शहीद भगत सिंह), गुरअमनीत सिंह मांगट (पी.एफ.एफ.), जंग सिंह भतेड़ी, गुरध्यान सिंह मियाणी भतेड़ी (बी.के.यू. भतेड़ी), बलवंत सिंह बहरमके, चमकौर सिंह (बी.के.यू. बहरमके), कृपाल सिंह (चंडीगढ़ नौजवान सभा), गुरमेल सिंह मोहली, मनजीत सिंह नियाल (बी.के.यू. एकता आज़ाद), हरभजन सिंह बाजवा, तरसेम सिंह ढिल्लों (बी.के.यू. दोआबा) के अलावा हजारों किसान-मज़दूर उपस्थित रहे।

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