संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता
नई दिल्ली
छात्र आंदोलनों पर बल प्रयोग के स्थान पर संवाद स्थापित कर समाधान निकाले ।
देश का युवा आज सड़कों पर इसलिए नहीं है कि उसे आंदोलन का शौक है, बल्कि इसलिए है कि उसे अपने भविष्य की चिंता है।
लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, परिवार अपनी जमा-पूंजी उनकी पढ़ाई पर खर्च करता है, लेकिन जब परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है या भर्ती प्रक्रिया विवादों में फंस जाती है, तो केवल एक परीक्षा नहीं टूटती, बल्कि करोड़ों सपने बिखर जाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर पेपर लीक तथा अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर हुआ है। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि देश की प्रतिभा के साथ अन्याय है।
ऐसी परिस्थितियों में यदि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो उनका स्वागत संवाद से होना चाहिए, लाठी से नहीं। लोकतंत्र में सरकार की ताकत विरोध को कुचलने में नहीं, बल्कि असहमति को सुनने और उसका समाधान करने में होती है। छात्रों पर लाठीचार्ज किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की उपलब्धि नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री जी, मंत्री बदलने से सरकार नहीं बदलती। यदि व्यवस्था वही रहे, जवाबदेही तय न हो और परीक्षा प्रणाली में सुधार न हो, तो केवल चेहरे बदलने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा। इसे सरकार की प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय देश के भविष्य का प्रश्न मानिए।
विपक्ष की भी जिम्मेदारी कम नहीं है। छात्रों के दर्द पर केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने, धरना-प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करने और चुनावी लाभ लेने से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के साथ है, तो उसे भी ठोस और व्यावहारिक सुधारों पर सरकार के साथ दबाव और सहयोग दोनों करना चाहिए।
आज आवश्यकता है कि सरकार स्पष्ट रूप से बताए—
1. पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर क्या स्थायी व्यवस्था बनाई जा रही है?
2. पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोहों और उनके संरक्षणकर्ताओं पर कितनी कठोर कार्रवाई हुई?
3. परीक्षा रद्द होने से छात्रों के समय, धन और मानसिक पीड़ा की भरपाई के लिए क्या नीति बनेगी?
4. भर्ती और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी एवं तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की समयबद्ध योजना क्या है?
प्रधानमंत्री जी, भारत विश्वगुरु तब बनेगा जब उसके युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा। लाठियों से आंदोलन कुछ समय के लिए दब सकते हैं, लेकिन अन्याय के खिलाफ उठने वाले सवाल नहीं दबते। युवाओं को प्रतिद्वंद्वी नहीं, राष्ट्र निर्माण का भागीदार मानिए।
आपसे आग्रह है कि छात्र प्रतिनिधियों से तत्काल वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान करें, पेपर लीक के दोषियों पर बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के कठोर कार्रवाई करें और ऐसी शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था स्थापित करें जिस पर देश का हर छात्र विश्वास कर सके।
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