प्रशासन के साथ वार्ता के दौरान हरियाणा के कृषि मंत्री ने सभी गिरफ्तार किसानों की तत्काल रिहाई


संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता 
नई दिल्ली 

देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर दिल्ली कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात; भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर विशाल जुटान। प्रशासन के साथ वार्ता के दौरान हरियाणा के कृषि मंत्री ने सभी गिरफ्तार किसानों की तत्काल रिहाई तथा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया।
देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर आज देश के विभिन्न राज्यों से हजारों किसान दिल्ली स्थित किसान घाट पहुंचने के लिए रवाना हुए। किंतु केंद्र की मोदी सरकार तथा हरियाणा की सैनी सरकार ने पंजाब के शंभू एवं खनौरी बॉर्डरों सहित हरियाणा के विभिन्न मार्गों पर भारी बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हरियाणा के भीतर भी दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को अनेक स्थानों पर रोका गया।
किसान नेताओं ने कहा कि पहले सरकार किसानों को सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से दिल्ली जाने की सलाह दे रही थी तथा ट्रैक्टरों के साथ न आने को कह रही थी, किंतु आज सार्वजनिक परिवहन से यात्रा कर रहे किसानों को भी रोक दिया गया। इस प्रकार सरकार अपने ही बयानों में उलझ गई है।

इसके बावजूद मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब के अनेक किसान किसान घाट पहुंचने में सफल रहे। सरकार ने किसानों को चार घंटे की सभा आयोजित करने की अनुमति भी नहीं दी और बड़ी संख्या में किसानों को हिरासत में लिया गया। किसान नेता सरजीत सिंह सहित लगभग 150 किसानों को गिरफ्तार किया गया, जबकि भारतीय किसान यूनियन के नेता वी.एम. सिंह को भी हिरासत में लिया गया। इससे पूर्व गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित अनेक किसान नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया था।

आज फतेहगढ़ साहिब से हजारों किसानों का काफिला शंभू बॉर्डर की ओर रवाना हुआ तथा बड़ी संख्या में किसान शंभू एवं खनौरी बॉर्डरों पर पहुंचे, जहां हरियाणा सरकार द्वारा भारी पुलिस बल तथा बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी।
किसान नेताओं ने कहा कि देश बचाओ मोर्चा के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों ने पूर्णतः शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन किया तथा किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न नहीं होने दिया। किसानों ने प्रशासन से कहा कि किसानों के मुद्दों का समाधान दमन से नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।

प्रशासन के साथ हुई वार्ता के दौरान हरियाणा के कृषि मंत्री, उपायुक्त अंबाला तथा अन्य अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी गिरफ्तार किसानों को तुरंत रिहा किया जाएगा तथा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक कराने के संबंध में पत्र भेजा जाएगा। विभिन्न किसान नेताओं से दूरभाष पर भी बातचीत कराई गई। शाम लगभग छह बजे सभी प्रमुख किसान नेताओं को रिहा कर दिया गया, जिसके बाद शंभू एवं खनौरी मोर्चों को समाप्त करने की घोषणा की गई। लाडोवाल टोल प्लाजा पर प्रस्तावित कार्यक्रम भी वापस ले लिया गया।

इस अवसर पर शंभू मोर्चे के मंच से किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में किसानों, मजदूरों और आम जनता को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य तथा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के बयानों में कृषि, डेयरी, डिजिटल व्यापार, बीज, खाद्य प्रणाली और बाजार पहुंच सहित व्यापक क्षेत्रों में समझौते को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।

किसान नेताओं ने कहा कि यदि यह समझौता लागू होता है तो अमेरिकी सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पाद, डेयरी उत्पाद, मक्का, सोयाबीन, कपास तथा अन्य कृषि जिंस भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर प्रवेश करेंगी, जिससे देश के करोड़ों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), सरकारी खरीद प्रणाली, खाद्य सुरक्षा तथा देश की आर्थिक संप्रभुता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। डेयरी क्षेत्र पर इसके विशेष रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेंगे, जिससे पंजाब सहित देश के लाखों छोटे दुग्ध उत्पादक प्रभावित होंगे।


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