चिनार पुस्तक महोत्सव 2026 में इम्तियाज़ अली की स्टोरीटेलिंग मास्टरक्लास ने कश्मीर के युवा फिल्मकारों को किया प्रेरित

संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता 
नई दिल्ली 

चिनार पुस्तक महोत्सव 2026 में इम्तियाज़ अली की स्टोरीटेलिंग मास्टरक्लास ने कश्मीर के युवा फिल्मकारों को किया प्रेरित

"अपनी कहानियों के प्रति ईमानदार रहें" : चिनार पुस्तक महोत्सव 2026 में इम्तियाज़ अली ने कश्मीर के उभरते फिल्मकारों का किया उत्साहवर्धन

श्रीनगर, 23 जुलाई 2026: चिनार पुस्तक महोत्सव के छठे दिन प्रख्यात फिल्म निर्देशक इम्तियाज़ अली ने कहानी प्रस्तुत करने की कला, अध्यात्म, सिनेमा और जीवन पर आत्मीय एवं विचारोत्तेजक संवाद से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस विशेष सत्र का संचालन चिनार पुस्तक महोत्सव के मुख्य संयोजक डॉ. अमित वांचू ने किया। सत्र में बड़ी संख्या में युवा पाठकों, उभरते फिल्मकारों, लेखकों और सिनेमा प्रेमियों ने भाग लिया।
इस पूरी बातचीत में सबसे भावपूर्ण क्षण वह था, जब इम्तियाज़ अली अपने जीवन और सिनेमा पर अध्यात्म के प्रभाव के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके घर का माहौल आध्यात्मिक चर्चाओं, भक्ति संगीत, सूफी कलामों और भजनों से समृद्ध था। भारत जैसे विविध सांस्कृतिक देश में पले-बढ़े होने के कारण उन्हें विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं से सीखने का अवसर मिला। उन्होंने अपनी चर्चित फिल्म 'रॉकस्टार' (2011) के प्रसिद्ध गीत "कुन फाया कुन" की रचना की प्रेरणा भी साझा की। उन्होंने बताया कि यह गीत क़ुरआन, ऋग्वेद तथा अनेक संतों और सूफी परंपराओं की शिक्षाओं से प्रेरित है।
इम्तियाज़ अली ने बताया कि छात्र जीवन में उन्होंने अपने स्कूल की लाइब्रेरी से जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' पढ़ी थी, जिसमें उन्होंने ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (सृष्टि सूक्त) का उल्लेख देखा। इस सूक्त की एक पंक्ति "तब न असत् था, न सत् था" , ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि इस दार्शनिक विचार की रहस्यमयता वर्षों तक उनके मन में बनी रही और अंततः यही भाव "कुन फ़ाया कुन" के आरंभिक शब्दों "जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था, वही था, वही था" को रचने की प्रेरणा बना।
उन्होंने 'रॉकस्टार' की शूटिंग के दौरान श्रीनगर, अरु और चंदनवाड़ी में बिताए अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि कश्मीर के लोगों ने उन्हें भरपूर स्नेह और सहयोग दिया। एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने बताया कि फिल्म के विवाह दृश्य में अभिनेत्री नर्गिस फाखरी द्वारा पहने गए पारंपरिक कश्मीरी आभूषण और परिधान डॉ. अमित वांचू की माता जी के थे।
इस आत्मीय बातचीत के बाद उपस्थित विद्यार्थियों, कलाकारों एवं युवा फिल्मकारों ने उनसे सवाल पूछने शुरू किए। सवालों का जवाब देते हुए इम्तियाज़ अली ने फिल्म निर्माण को हमेशा सीखते रहने और कुछ नया खोजने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक फिल्म ने उन्हें नई संस्कृतियों, नए लोगों और नए अनुभवों से परिचित कराया। 'रॉकस्टार' के माध्यम से उन्हें कश्मीर, उसके लोगों और उसकी परंपराओं को निकट से समझने का अवसर मिला, जबकि 'लैला मजनू' जैसी फिल्मों ने अनेक कश्मीरी कलाकारों, संगीतकारों और तकनीशियनों को मुख्यधारा के सिनेमा में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे इस क्रिएटिव वर्ल्ड में केवल तभी आएं जब उनमें उसके लिए सचमुच विश्वास और रुचि हो।न कि उसकी चकाचौंध से आकर्षित होकर। उन्होंने कहा कि रचनात्मक क्षेत्रों में हर नए प्रोजेक्ट के साथ स्वयं को फिर से सिद्ध करने का साहस और धैर्य आवश्यक होता है। युवा कलाकारों को अपनी अनुभूतियों और अनुभवों के प्रति ईमानदार रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि महान कला केवल दर्द से ही जन्म लेती है, यह धारणा सही नहीं है। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी की सराहना करते हुए कहा कि वे केवल भौतिक सफलता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण, समाज और सार्थक कार्यों के प्रति भी संवेदनशील और जागरूक हैं।
ऑथर्स कॉर्नर में आयोजित "स्वाइप, स्क्रॉल, रीड : रीडिफाइनिंग रीडिंग" सत्र में बच्चों में बढ़ती स्क्रीन की आदत का उनके ध्यान, रचनात्मकता और अध्ययन की आदतों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की गई। सना जावेद, डॉ. मेहरीन रियाज़, डॉ. अबीर आफ़ताब और मौमिल मेहराज ने कैनात भट्ट के संचालन में डिजिटल माध्यमों के संतुलित उपयोग, पुस्तकों को नियमित पढ़ने, सूचनाओं के विवेकपूर्ण चयन तथा लेखन संस्कृति को जिंदा रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
सिक्योरिटीज एंड एक्सजेंड बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) द्वारा आयोजित "सिक्योरिटीज मार्केट में सेफ इनवेस्टमेंट" विषय पर विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें युवाओं को समझदारी से निवेश करने, चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) ब्याज की शक्ति, वित्तीय अनुशासन और सुरक्षित भविष्य के निर्माण जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी दी गई। मृदुल रस्तोगी, शांतनु चक्रवर्ती और गौरव रावल ने विपुल जैन के संचालन में प्रतिभागियों को सुरक्षित निवेश के तरीकों, लिक्विडिटी के महत्व तथा शेयर बाज़ार में होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी दी। सत्र का समापन एक रोचक इंटरैक्टिव क्विज़ के साथ हुआ, जिसने युवाओं को अपनी वित्तीय जागरूकता परखने का अवसर प्रदान किया।
"कश्मीर की सौंदर्यपरक साहित्यिक विरासत : परंपरा, नवाचार और प्रभाव" (The Literary Aesthetic Legacy of Kashmir: Tradition, Innovation and Influence) विषय से आयोजित सत्र में कश्मीरी साहित्यिक में सौंदर्यबोध के विकास और उसकी विशिष्ट परंपरा पर संवाद किया गया। इस दौरान लोक परंपराओं, सूफी काव्य, संस्कृत-फारसी साहित्यिक प्रभावों तथा कल्पना, प्राकृतिक परिवेश और सांस्कृतिक स्मृतियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई, जिन्होंने कश्मीर की साहित्यिक अभिव्यक्ति को विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया है।
चिनार पुस्तक महोत्सव में पहली बार आयोजित "इनोवेटर्स मीट" में शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, कश्मीर (SKUAST-K) के यंग इनोवेटर्स ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए प्रौद्योगिकी आधारित इनोवेशन्स प्रस्तुत की। इनमें स्मार्ट कृषि उपकरणों तथा रिसर्च बेस्ड तकनीकों के माध्यम से खेती की दक्षता, स्थिरता और उत्पादकता बढ़ाने के उपायों को प्रदर्शन किया गया। इन इनोवेशन्स ने यह भी दर्शाया कि कृषि से जुड़ी दैनिक समस्याओं को व्यावहारिक एवं व्यापक उपयोग वाले तकनीकी समाधानों में परिवर्तित किया जा सकता है।
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में लगभग 3,000 बाल पाठकों आस्था और तसनीम द्वारा प्रस्तुत कामिशिबाई स्टोरीटेलिंग सत्र के भागीदार बने। इस सत्र के माध्यम से बच्चों को जापान की पारंपरिक विजुअल स्टोरीटेलिंग आर्ट कामिशिबाई से परिचित कराया गया। वहीं हिम्मत सिंह नेगी द्वारा आयोजित वॉयसओवर कार्यशाला ने बच्चों को स्वर-संचालन, प्रभावशाली अभिव्यक्ति और रचनात्मक संप्रेषण की बारीकियों को समझने और सीखने का अवसर प्रदान किया।
सांस्कृतिक संध्या में हयात भगत थिएटर कश्मीर, परफॉर्मर्स कलेक्टिव और कर्टेन कॉल थिएटर की रंगमंचीय प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इसके साथ ही राजा बिलाल और शाही मुमताज की आकर्षक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। शाम का मुख्य आकर्षण "शाम-ए-सूफ़ियाना" रहा, जिसमें प्रसिद्ध सूफी एवं ग़ज़ल गायिका डॉ. नीता पांडे नेगी ने सूफी रचनाओं और ग़ज़लों की भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


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