नई दिल्ली नगरपालिका परिषद
संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता
• एनडीएमसी अध्यक्ष ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ‘वेस्ट वाइज़ सिटिज़न्स’ पुस्तिका का किया विमोचन,
• एनडीएमसी अध्यक्ष ने घर-घर से रीसाइक्लिंग योग्य कचरा एकत्र करने के लिए ‘आरआरआर ऑन व्हील्स’ वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
नई दिल्ली, 08 जुलाई, 2026.नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप के सहयोग से आज ‘वेस्ट वाइज़ सिटिज़न्स – ए प्रैक्टिकल गाइड टू मेकिंग द सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) रूल्स, 2026 पार्ट ऑफ आवर डेली लाइव्स’ नामक नागरिक जागरूकता पुस्तिका का विमोचन किया। इस पुस्तिका का उद्देश्य एनडीएमसी क्षेत्र के निवासियों एवं संस्थानों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रति बेहतर समझ विकसित करना तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है। इसी अवसर पर पुनर्चक्रण के लिए नागरिकों के घरों से सीधे कचरा एकत्र करने हेतु ‘आरआरआर ऑन व्हील्स’ वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
इस पुस्तिका का विमोचन एनडीएमसी अध्यक्ष श्री केशव चंद्रा ने एनडीसीसी फेज-2 के सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में किया। कार्यक्रम में एनडीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी, चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप के प्रतिनिधि, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन (एमटीए), शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी), स्वच्छता अधिकारी तथा अन्य हितधारक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री केशव चंद्रा ने कहा कि यह पुस्तिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों को सरल, स्पष्ट एवं सहज भाषा में प्रस्तुत करती है ताकि प्रत्येक नागरिक उन्हें समझकर अपने दैनिक जीवन में अपनाए। उन्होंने कहा कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की आधारशिला है।
उन्होंने कहा, “कचरा प्रबंधन की सफलता दो स्तरों पर समन्वित प्रयासों पर निर्भर करती है। पहला दायित्व प्रत्येक नागरिक एवं परिवार का है, जहां कचरा उत्पन्न होता है। दूसरा दायित्व नगर निकाय का है, जिसे पृथक किए गए कचरे का वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण तथा पुनः उपयोग योग्य संसाधनों में रूपांतरण सुनिश्चित करना होता है। नागरिकों और नगर निकाय की साझा भागीदारी से ही टिकाऊ एवं प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संभव है।”
श्री चंद्रा ने एनडीएमसी की ‘अनुपम कॉलोनी’, आरआरआर सेंटर तथा ‘नेकी की दीवार’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अभियानों ने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा दिया है। उन्होंने इन पहलों के उत्साहजनक परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशनों तथा गैर-सरकारी संगठनों से एनडीएमसी के साथ सक्रिय साझेदारी कर शहर में सुदृढ़ अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण, विकेन्द्रीकृत प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण तथा जिम्मेदार निस्तारण पर विशेष बल देते हुए वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन का व्यापक ढांचा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निकाय की आधारभूत संरचना महत्वपूर्ण है, किन्तु इसकी सफलता नागरिकों, संस्थानों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा, “वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की दिशा में स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक घर, कार्यालय, बाजार और संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है ताकि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का पुनः उपयोग हो, जैविक कचरे का उचित प्रसंस्करण हो तथा केवल न्यूनतम मात्रा में ही कचरा लैंडफिल तक पहुंचे।”
इस अवसर पर चिंतन की निदेशक सुश्री भारती चतुर्वेदी ने पुस्तिका की जानकारी देते हुए कहा कि हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रकाशित यह पुस्तिका नागरिकों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अंतर्गत उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को समझाने हेतु एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीति और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करते हुए नियमों के प्रावधानों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना तथा घरों, संस्थानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जिम्मेदार कचरा प्रबंधन के लिए व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।
उन्होंने बताया कि इस पुस्तिका में चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण—गीला (जैविक), सूखा (अजैविक), सैनिटरी तथा विशेष देखभाल श्रेणी के कचरे—की अवधारणा को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही, इसमें परिवारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों एवं बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें विकेन्द्रीकृत कचरा प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग, पुनर्चक्रण, वैज्ञानिक निस्तारण तथा लैंडफिल पर निर्भरता कम करने के उपायों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है।
पुस्तिका में जैविक कचरा, प्लास्टिक, कागज, वस्त्र, जूते-चप्पल, धातु, ई-वेस्ट, बैटरियां, घरेलू खतरनाक कचरा, टायर एवं सैनिटरी कचरे सहित विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के प्रबंधन पर अलग-अलग अध्याय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इसमें कचरा उत्पादन कम करने, वस्तुओं की मरम्मत एवं पुनः उपयोग, सतत उपभोग की आदतों को अपनाने तथा संसाधनों की पुनर्प्राप्ति के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया है।
यह प्रकाशन शहर की पुनर्चक्रण व्यवस्था में अनौपचारिक कचरा संग्रहकर्ताओं के महत्वपूर्ण योगदान को भी रेखांकित करता है तथा विकेन्द्रीकृत कचरा पुनर्प्राप्ति केंद्रों एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें औपचारिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने के एनडीएमसी के प्रयासों को भी दर्शाता है।
एनडीएमसी और चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह पुस्तिका विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति, सर्कुलर इकोनॉमी तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने में दोनों संस्थाओं की दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक है। इसमें नगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ कचरा कम करने, वस्तुओं की मरम्मत एवं पुनः उपयोग को बढ़ावा देने, खतरनाक कचरे के सुरक्षित निस्तारण, प्लास्टिक एवं ई-वेस्ट के जिम्मेदार प्रबंधन तथा बेहतर कचरा प्रबंधन के माध्यम से जनस्वास्थ्य सुधार के व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए हैं।
‘आरआरआर ऑन व्हील्स’ पहल के माध्यम से एनडीएमसी एवं चिंतन का रिड्यूस, रीयूज़, रीसायकल (आरआरआर) मॉडल अब एनडीएमसी क्षेत्र के आठ माइक्रो मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमएमआरएफ) सह आरआरआर केंद्रों से आगे बढ़कर सीधे नागरिकों के घरों तक पहुंच गया है। यह सेवा विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए उपयोगी होगी जो घर पर कचरे का पृथक्करण तो करते हैं, लेकिन उसे आरआरआर केंद्र तक ले जाने में असमर्थ हैं।
मौजूदा निःशुल्क संग्रहण सेवा को और सुदृढ़ बनाते हुए यह पहल स्रोत स्तर पर पृथक्करण एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति को गतिशील स्वरूप प्रदान करती है। इसके माध्यम से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री, ई-वेस्ट, वस्त्र एवं अन्य सूखे कचरे को अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं तक पहुंचाया जाएगा तथा नागरिकों को शून्य-अपशिष्ट (ज़ीरो वेस्ट) अभियान से जोड़ने के लिए अधिक सुलभ एवं नागरिक-अनुकूल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
यह पहल अनौपचारिक कचरा संग्रहकर्ताओं के प्रति कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है। प्रशिक्षित कचरा संग्रहकर्ताओं को इस अभियान से जोड़ते हुए उन्हें नमस्ते (NAMASTE) जैसी औपचारिक पहचान एवं आजीविका योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा, जिससे जहां नागरिकों के लिए पुनर्चक्रण अधिक सुविधाजनक होगा, वहीं इस कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए यह अधिक सम्मानजनक एवं सुरक्षित भी बनेगा।
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