नई दिल्ली नगरपालिका परिषद
संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता
• उपाध्यक्ष, एनडीएमसी ने नई दिल्ली क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने हेतु “डी.आर.ओ.पी.” पहल का शुभारंभ किया,
• उपाध्यक्ष, एनडीएमसी ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक से निर्मित डी.आर.ओ.पी. सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया तथा प्लास्टिक कचरा संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया .
नई दिल्ली, 12 जून, 2026.माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत, मिशन लाइफ (LiFE) तथा विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित होकर, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के उपाध्यक्ष - श्री कुलजीत सिंह चहल ने आज किआ इंडिया तथा इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के सहयोग से प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. (Develop Responsible Outlook for Plastic) का शुभारंभ किया। यह पहल प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ करने, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने तथा पर्यावरणीय स्थिरता के लिए जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर श्री चहल ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक अपशिष्ट से निर्मित डी.आर.ओ.पी. सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया तथा डी.आर.ओ.पी. संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण की एक सुव्यवस्थित प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर एनडीएमसी परिषद सदस्य - श्री अनिल वाल्मीकि, आईपीसीए के सचिव - श्री अजय गर्ग, आईपीसीए की उपनिदेशक - डॉ. राधा गोयल, किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष - श्री अतुल सूद, एनडीएमसी की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी - डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारीगण, आरडब्ल्यूए, एमटीए के प्रतिनिधि तथा अन्य हितधारक उपस्थित रहे।
डी.आर.ओ.पी. (Develop Responsible Outlook for Plastic) डिब्बों का उद्घाटन करने के उपरांत एनडीएमसी के उपाध्यक्ष - श्री कुलजीत सिंह चहल ने कहा, “एनडीएमसी के लिए यह गर्व के साथ-साथ जिम्मेदारी का विषय है कि वर्ष 2014 में माननीय प्रधानमंत्री - श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ एनडीएमसी क्षेत्र स्थित वाल्मीकि बस्ती से किया था। भौगोलिक दृष्टि से एनडीएमसी एक अपेक्षाकृत छोटा शहरी निकाय है, किन्तु इसके अधिकार क्षेत्र में संसद भवन, केंद्र सरकार के मंत्रालय, विदेशी दूतावास तथा राष्ट्रीय महत्व के अनेक संस्थान आते हैं। इसलिए एनडीएमसी द्वारा संचालित प्रत्येक स्वच्छता एवं पर्यावरणीय पहल का प्रभाव और संदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचता है। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उठाए गए छोटे किंतु सार्थक कदम ही बड़े परिवर्तन की नींव बनते हैं।”
श्री चहल ने आगे बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2021 से इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “इस सहयोग के अंतर्गत 115 एरोबिन स्थापित किए गए हैं, 62,958 किलोग्राम गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया है तथा 10,013 किलोग्राम कम्पोस्ट का उत्पादन हुआ है। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए एनडीएमसी और आईपीसीए अब प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. को लागू कर रहे हैं, जिसके तहत पूरे एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण हेतु विशेष डिब्बे स्थापित किए जाएंगे। यह परियोजना प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन, पृथक्करण एवं अधिकृत पुनर्चक्रण चैनलों के माध्यम से उसके पुनर्चक्रण को सुनिश्चित करेगी।”
इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री कुलजीत सिंह चहल ने विश्वास व्यक्त किया कि “प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. माननीय प्रधानमंत्री - श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा परिकल्पित स्वच्छ भारत, मिशन लाइफ तथा विकसित भारत @2047 के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। जन-जागरूकता को बढ़ावा देकर, नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी को प्रोत्साहित कर, क्षमता निर्माण को मजबूत बनाकर तथा प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित कर यह पहल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, लैंडफिल पर भार घटाने तथा एक स्वच्छ, हरित एवं टिकाऊ नई दिल्ली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुझे विश्वास है कि प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. देशभर में पर्यावरणीय जिम्मेदारी एवं सामुदायिक सहभागिता को प्रेरित करने वाला एक आदर्श मॉडल बनेगा।”
इस अवसर पर एनडीएमसी परिषद सदस्य - श्री अनिल वाल्मीकि ने एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं निपटान हेतु डी.आर.ओ.पी. परियोजना के शुभारंभ में सहयोग प्रदान करने के लिए किआ इंडिया एवं आईपीसीए के प्रतिनिधियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल न केवल देश की राजधानी के हृदय स्थल नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरे की चुनौती से निपटने में सहायक होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी दीर्घकालिक गंभीर खतरे उत्पन्न करता है। श्री वाल्मीकि ने कहा कि यद्यपि सरकार एवं नगर निकाय अपने-अपने स्तर पर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन हेतु प्रयास कर रहे हैं, किन्तु केवल इन प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी पहलों की सफलता काफी हद तक जन-जागरूकता तथा प्रत्येक घर से प्लास्टिक कचरे के उचित पृथक्करण एवं निस्तारण में सक्रिय नागरिक भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने आरडब्ल्यूए, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन तथा सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों से इस महत्वपूर्ण मिशन में एनडीएमसी का सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों एवं जनभागीदारी के माध्यम से ही समाज पर्यावरण के समक्ष उपस्थित इस गंभीर चुनौती का प्रभावी समाधान कर सकता है।
प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के शुभारंभ पर किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (सेल्स एवं मार्केटिंग) श्री अतुल सूद ने कहा, “भारत के शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के निरंतर विकसित होने के साथ ही संरचित एवं टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के माध्यम से किआ इंडिया सार्थक व्यवहारगत परिवर्तन को बढ़ावा देने तथा जिम्मेदार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मजबूत जमीनी ढांचे के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध है। हमें आईपीसीए एवं एनडीएमसी के साथ मिलकर इस पहल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लागू करने तथा देशव्यापी पर्यावरणीय परिवर्तन के लिए एक अनुकरणीय मॉडल विकसित करने पर गर्व है।”
इस अवसर पर संबोधित करते हुए आईपीसीए के सचिव - श्री अजय गर्ग ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया तथा राष्ट्रीय राजधानी में प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के विस्तार को संभव बनाने वाले सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की।
आईपीसीए की उपनिदेशक - डॉ. राधा गोयल ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए इसके क्रियान्वयन ढांचे, जमीनी स्तर पर इसके मापनीय प्रभाव तथा भारत के विभिन्न शहरों के लिए एक विस्तारणीय शहरी स्थिरता मॉडल के रूप में विकसित होने की इसकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डी.आर.ओ.पी. परियोजना के शुभारंभ समारोह में एनडीएमसी क्षेत्र की विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) एवं मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशनों (एमटीए) के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही एनडीएमसी के स्वच्छता, उद्यान एवं सिविल अभियांत्रिकी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं समर्पित कर्मचारियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। उनकी सहभागिता ने नागरिक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने, शहरी आधारभूत संरचना को बेहतर करने तथा स्वच्छ, हरित और सतत नई दिल्ली के निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता और सहयोग की भावना को प्रतिबिंबित किया।
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