संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता
नई दिल्ली
05 जून 2026 रबी फसलों के एमएसपी निर्धारण में किसानों की वास्तविक लागत को आधार बनाया जाए –धर्मेंद्र मलिक भाकियू अराजनैतिक
एमएसपी का निर्धारण किसानों की वास्तविक C2 लागत (भूमि किराया, पारिवारिक श्रम, पूंजी ब्याज सहित) पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर किया जाए-
नई दिल्ली/मुजफ्फरनगर,
नई दिल्ली में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा रबी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण के संबंध में अम्बेडकर भवन नई दिल्ली में आयोजित बैठक के अवसर पर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने आयोग को किसानों के हित में महत्वपूर्ण सुझाव प्रेषित किए।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि रबी फसलों का एमएसपी किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि एमएसपी का निर्धारण सी-2 (C2) लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि डीजल, बिजली, उर्वरक, बीज, कीटनाशक एवं मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि हुई है, जिसे एमएसपी निर्धारण में समुचित महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही गेहूं, चना, मसूर, जौ तथा सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों के समर्थन मूल्य में लागत वृद्धि के अनुरूप पर्याप्त बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
धर्मेंद्र मलिक ने यह भी सुझाव दिया कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत बनाकर किसानों से प्रभावी खरीद सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, असामान्य वर्षा, ओलावृष्टि तथा अन्य प्राकृतिक जोखिमों को भी एमएसपी निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने हेतु दलहन एवं तिलहन फसलों के एमएसपी को अधिक आकर्षक बनाया जाना चाहिए, जिससे फसल विविधीकरण और जल संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिल सके।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक को आशा है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग किसानों के सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रबी फसलों के लिए लाभकारी एवं न्यायसंगत एमएसपी की संस्तुति करेगा।
सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP)
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
विषय: रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण हेतु सुझाव।
महोदय,
रबी फसलों के एमएसपी निर्धारण के संबंध में निम्नलिखित सुझाव आयोग के विचारार्थ प्रस्तुत हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का न्यायसंगत मूल्य प्राप्त हो सके तथा कृषि क्षेत्र को स्थिरता एवं लाभप्रदता मिल सके।
प्रमुख सुझाव
C2 लागत पर न्यूनतम 50% लाभ
एमएसपी का निर्धारण किसानों की वास्तविक C2 लागत (भूमि किराया, पारिवारिक श्रम, पूंजी ब्याज सहित) पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर किया जाए।
क्षेत्रवार लागत का समुचित मूल्यांकन
विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों में उत्पादन लागत में अंतर को ध्यान में रखते हुए लागत आंकड़ों का नियमित अद्यतन किया जाए।
महंगाई एवं इनपुट लागत का प्रभाव
डीजल, बिजली, उर्वरक, बीज, कीटनाशक एवं मजदूरी में हुई वृद्धि को एमएसपी निर्धारण में उचित महत्व दिया जाए।
जल संरक्षण को प्रोत्साहन
कम पानी वाली फसलों जैसे चना, मसूर, सरसों आदि को आकर्षक एमएसपी देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
गुणवत्ता आधारित बोनस
बेहतर गुणवत्ता वाली उपज के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि या बोनस की व्यवस्था की जाए।
बाजार मूल्य एवं एमएसपी में पर्याप्त अंतर
एमएसपी इतना आकर्षक हो कि किसानों को निजी व्यापारियों द्वारा कम मूल्य पर उपज बेचने के लिए विवश न होना पड़े।
खरीद व्यवस्था को मजबूत किया जाए
केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है; सरकारी खरीद केंद्रों की संख्या एवं क्षमता बढ़ाकर प्रभावी खरीद सुनिश्चित की जाए।
जलवायु जोखिम का समावेश
असामान्य वर्षा, ओलावृष्टि, सूखा तथा तापमान परिवर्तन से बढ़े जोखिम को भी एमएसपी निर्धारण में शामिल किया जाए।
गेहूं एवं दलहन पर विशेष ध्यान
रबी की प्रमुख फसलों गेहूं, चना, मसूर, जौ एवं सरसों के एमएसपी में लागत वृद्धि के अनुरूप पर्याप्त बढ़ोतरी की जाए।
एमएसपी की समयपूर्व घोषणा
किसानों को फसल चयन एवं निवेश संबंधी निर्णय लेने में सुविधा हेतु रबी फसलों का एमएसपी समय रहते घोषित किया जाए।
निष्कर्ष
कृषि क्षेत्र की स्थिरता, खाद्य सुरक्षा तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए आवश्यक है कि एमएसपी निर्धारण वास्तविक लागत, जोखिम और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाए। आयोग उपरोक्त सुझावों पर विचार कर किसानों के हित में उचित निर्णय लेने की कृपा करे।
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