बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल 2026 में भारत ने जीता दिल : एक नए उज्ज्वल अध्याय का आरंभ

संवाददाता -पवन कुमार गुप्ता 
नई दिल्ली 

बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल 2026 में भारत ने जीता दिल : एक नए उज्ज्वल अध्याय का आरंभ


बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026 में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत की भूमिका गरिमापूर्ण एवं प्रभावशाली रही। यह एक ऐसा क्षण था, जिसे इतिहास में याद किया जाएगा और जिसका गहन प्रतीकात्मक महत्व भी है।  बोगोटा में भारत की भूमिका केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह एक उत्सव के रूप में नजर आई। एक व्यापक सांस्कृतिक यात्रा, जिसने वैश्विक मंच पर भारत के लिए महत्वपूर्ण और यादगार अवसर प्रदान किया।
भारत के कोलंबिया में राजदूत वेनललहुमा (Vanlalhuma) ने कहा, “भारत को ‘विशिष्ट अतिथि देश’ के रूप में आमंत्रित किया जाना… निश्चित रूप से कोलंबिया और इस क्षेत्र के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करेगा। इसलिए हम यहाँ अपनी भागीदारी से बहुत प्रसन्न हैं।”
विमर्श, कहानियों और परंपराओं के एक जीवंत संगम के रूप में उभरते हुए इंडिया पैविलियन मेले के सबसे प्रिय स्थलों में से एक बना रहा, जहाँ बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026 के अनुमान के अनुसार लगभग 3,00,000 आगंतुकों की अभूतपूर्व और विशाल उपस्थिति दर्ज की गई। इस विशाल सहभागिता का संकेत कोलंबियाई बुक चैंबर के कार्यकारी अध्यक्ष एमिरो अरिस्टिज़ाबेल (Emiro Aristizábal), के कथन में पहले ही मिल गया था, “पहले दिन से ही यहाँ का अनुभव अद्भुत रहा है। अंदर प्रवेश करने के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं… मुझे आशा है कि हम कुल 6,00,000 आगंतुकों तक पहुँचेंगे, और मेरा मानना है कि उनमें से आधे से अधिक इंडिया पैविलियन का रुख करेंगे।”
यह जबरदस्त प्रतिक्रिया केवल प्रस्तुति के पैमाने का ही प्रमाण नहीं है, बल्कि विशुद्ध जिज्ञासा और आत्मीयता का भी प्रतीक है, जिसके साथ भारत को अपनाया गया। जिसके लिए एक विजिटर ने कहा, “मैं बोगोटा में भारत की एक झलक पाकर खुश हूँ।”

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा, कोलंबिया में भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित और नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा साकार ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में प्रस्तुति किसी भी अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में अब तक का भारत का सबसे वृहत और विविध प्रदर्शन था।

इसमें लेखकों, कलाकारों, चिंतकों, प्रकाशकों और प्रस्तुतकर्ताओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। वे स्वर जो परंपरा में गहराई से जुड़े होने के साथ वर्तमान समय से भी पूरी तरह संवाद करते हैं। इस पूरे आयोजन का नेतृत्व प्रो मिलिंद सुधाकर मराठे ने किया, जिन्होंने इंडिया पैविलियन के उद्घाटन अवसर पर अपने स्वागत भाषण में दर्शकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि वे यहां “भारतीय संस्कृति की विविधता का अनुभव करें,” जिसे भारत की समृद्ध विरासत को प्रतिबिंबित करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया था।

इसके गहन उद्देश्य को और स्पष्ट करते हुए, श्रेयांश मोहन (Shreyansh Mohan), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप सचिव, ने कहा कि यह पैविलियन “केवल पुस्तकों के आदान-प्रदान का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक क्षितिज को बुनने का प्रयास है।”
लगभग 3,000 वर्ग मीटर में फैला यह पैविलियन एक सजीव, अनुभवात्मक संसार के रूप में कल्पित किया गया था। जहाँ भारत की सभ्यतागत गहराई उसकी समकालीन रचनात्मक ऊर्जा से मिलती है। केरल के नालुकेट्टू (Nalukettu) का स्थापत्य, आमेर फोर्ट (Amber Fort) की भव्यता और हम्पी बाजार (Hampi Bazaar) की जीवंतता से प्रेरित इस स्थल ने आगंतुकों को एक सजीव कथा में दाखिल होने का अवसर दिया। 
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन टीम का नेतृत्व कर रही नीजू दुबे के अनुसार, “पैविलियन का संदेश और अवधारणा यही है… कि आगंतुकों को ऐसा अनुभव हो जैसे वे एक साथ कई भारत देख रहे हों।”
सात विचारपूर्ण प्रदर्शनियों, 105 से अधिक साहित्यिक सत्रों, 27 फिल्म प्रस्तुतियों और 14 सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मिलकर अनुभवों की एक समृद्ध बुनावट तैयार की। शास्त्रीय नृत्य की लय से लेकर रवीेंद्र संगीत की मधुरता तक, एआई-आधारित अनुभवों से लेकर भारतीय व्यंजनों के जायके तक, इस पैविलियन को केवल देखा नहीं गया, बल्कि महसूस किया गया।

कोलंबियाई फोटो-पत्रकार एमिलो एपारिसियो रॉड्रिगज़ (Emilio Aparicio Rodríguez) का कहना था, “सब कुछ बेहद योजनाबद्ध था… ताकि हम कोलंबियाई लोगों को भारत से जोड़ सकें।”
इसके केंद्र में सात प्रदर्शनियां थीं, जिन्होंने भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक यात्रा के विविध आयामों को प्रस्तुत किया। जिनमें सदियों से चली आ रही महिला चिंतकों की आवाज़ों को रेखांकित किया गया, महात्मा गांधी के लेखक रूप में स्थायी प्रभाव को प्रकाश में लाया, और आधुनिक भारतीय साहित्य के प्रमुख स्वरों का उत्सव मनाया।

आगंतुकों ने भारत की पठन परंपराओं, कलात्मक विरासत, पारिस्थितिक चेतना और समकालीन उपलब्धियों से साक्षात्कार किया। हर परत के साथ एक ऐसी सभ्यता की समझ और गहरी होती गई, जो प्राचीन भी है और निरंतर विकसित भी हो रही है।
इसका प्रभाव तात्कालिक और गहरा था। कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति एमेस्टो सेम्पर (Ernesto Samper) के अनुसार, “यह अद्भुत है कि उन्होंने इस पैविलियन में भारतीय सभ्यता के हजारों वर्षों को इतने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है,” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोलंबियाई लोग “भारतीय सभ्यता के प्रभाव के साथ एक गहरा संबंध महसूस करते हैं।”
‘भारत/इंडिया स्टेज’ संवाद का एक सशक्त मंच बनकर उभरा, जहाँ भारतीय और कोलंबियाई दृष्टिकोणों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ। संवाद सत्रों में डिजिटल युग में प्रकाशन और साहित्य के भविष्य से लेकर रचनात्मकता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े दार्शनिक प्रश्नों तक पर चर्चा हुई। इन विचार-विमर्शों के बीच एक साझा समझ उभरी कि तकनीक भले ही पहुँच को बदल दे, लेकिन साहित्य की आत्मा मूलतः मानवीय ही रहती है।

इसी भावना को व्यक्त करते हुए प्रो मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा, “पढ़ना केवल एक व्यक्तिगत क्रिया नहीं है… यह परिवार के साथ मिलकर किया जाने वाला सामूहिक प्रयास होना चाहिए… और मुझे लगता है कि कोलंबियाई विजिटर्स भारतीय साहित्य और संस्कृति को गहराई से समझ रहे हैं।”
यह भावना स्थानीय संस्थाओं के साथ भी गहराई से प्रतिध्वनित हुई। फंडालेक्टूरा फाउंडेशन (FundaLectura Foundation) की डायना रे (Diana Rey) ने कहा, “हम रीडिंग को फैमिली के साथ जोड़ने की इसी सोच को साझा करते हैं… यह भारतीय संस्कृति को जानने का एक बेहतरीन अवसर है।”

नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा संचालित अनुवाद पहल के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों के बीच एक सार्थक सेतु का निर्माण हुआ। 75 भारतीय पुस्तकों का स्पेनिश में अनुवाद, जिनमें से 50 से अधिक का विमोचन बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026 में हुआ। इस अनुवाद के माध्यम से भारतीय चिंतन, कथा-साहित्य और दर्शन को स्पेनिश भाषी दुनिया में एक नई पहचान मिली। इन कृतियों ने महाद्वीपों के पार गहरे साहित्यिक संबंधों के द्वार खोल दिए।

मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक, एनबीटी-इंडिया तथा ‘विशिष्ट अतिथि’ प्रस्तुति के परियोजना प्रमुख, श्री कुमार विक्रम ने कहा, “ फिलबो (FILBo) में भारत की भागीदारी अत्यंत सफल रही है। हमें विशेष रूप से कोलंबियाई तथा अन्य लैटिन अमेरिकी प्रकाशकों के साथ हुई सकारात्मक बातचीत से खुशी है, जो अपनी प्रकाशन पहलों के अंतर्गत ‘इंडिया सीरीज़’ शुरू करने के इच्छुक हैं।”

इस दूरदर्शी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, युवराज मलिक, निदेशक, एनबीटी-इंडिया, ने कहा, “हमारे लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम कोलंबिया में भारतीय पुस्तकों और संस्कृति को प्रस्तुत करें… अब हम नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में कोलंबिया को ‘विशिष्ट अतिथि’ देश के रूप में आमंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

पैविलियन में युवा दर्शकों का जुड़ाव और भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। ‘किड्स ज़ोन’ कल्पना और खोज से भरपूर था, जहाँ स्टोरीटेलिंग, कार्यशालाएँ और इंटरैक्टिव सेशन ने बच्चों में जिज्ञासा और आनंद का संचार किया। बच्चे और छात्र केवल दर्शक बनकर नहीं रहे, बल्कि सक्रिय भागीदार के रूप में सामने आए। प्रश्न पूछते हुए, साक्षात्कार करते हुए और भारत की सांस्कृतिक दुनिया से अपने स्वयं के संबंध बनाते हुए।

टेटियाना रुड (Tatiana Rudd) के अनुसार, “साहित्य और संस्कृति के प्रेमियों का एक समर्पित वर्ग… इस अद्भुत प्रस्तुति का भरपूर आनंद ले रहा था।” वहीं एड्रियाना एंजेल (Adriana Ángel) ने  बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026 में भारत की भागीदारी को “एक मील का पत्थर” बताया और कहा कि विजिटर यहाँ से “इस संस्कृति के बारे में और अधिक जानने की इच्छा” के साथ लौट रहे हैं।
भारतीय लय केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही, यह संगीत, नृत्य और सिनेमा के माध्यम से भी जीवंत होकर सामने आई। मंच पर प्रस्तुत नृत्य और संगीत कार्यक्रमों ने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया, वहीं फिल्म प्रदर्शनों ने संस्कृतियों के बीच एक सिनेमा सेतु का निर्माण किया। इन सबने मिलकर दर्शकों को भारत की कलात्मक आत्मा की एक बहु-इंद्रिय यात्रा का अनुभव कराया।

विजिटर्स ने इस अनुभव को अपने शब्दों में यूँ व्यक्त किया, “मैंने भारत की संस्कृति, रहस्यवाद और आध्यात्मिकता को उनकी पूर्ण भव्यता में महसूस किया,” जबकि एक अन्य ने कहा, “यह पैविलियन भारतीय संस्कृति की समृद्धि को प्रदर्शित कर रहा है।”

अनुभवी पर्यवेक्षकों पर भी इसका प्रभाव उतना ही गहरा रहा। कारमेन ब्रेवो (Carmen Bravo) का कहना था, “मैंने कभी इतना सुंदर, ज्ञानवर्द्धक और अद्भुत पैविलियन नहीं देखा,” और इसे “पढ़ने और इस देश को जानने की प्रेरणा” बताया।

भारत की उपस्थिति की गूंज कोलंबिया और उससे परे विभिन्न मीडिया मंचों पर भी व्यापक रूप से सुनाई दी। लेकिन कवरेज और भीड़ से आगे बढ़कर, जो बात इस भागीदारी को वास्तव में विशिष्ट बनाती है, वह है इसकी गहराई। भाषाओं और भौगोलिक सीमाओं के पार स्थापित वे सार्थक, मानवीय संबंध, जिन्होंने इसे एक विशेष अनुभव बना दिया।

कोलंबिया की मिनिस्टर ऑफ कल्चर, आर्ट एंड नॉलेज यन्नाई कादामानि फोनरोडोना (Yannai Kadamani Fonrodona) ने इंडिया पैविलियन के उद्घाटन के अवसर पर कहा, भारत की उपस्थिति “भारत और कोलंबिया के बीच और व्यापक रूप से लैटिन अमेरिका के साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक समझ को समृद्ध करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026 में भारत की यह असाधारण उपस्थिति केवल एक सफल सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं है, यह भारत–कोलंबिया संबंधों में एक नए अध्याय की उदघोषणा है। यह भारत की सॉफ्ट डिप्लोमेसी की एक सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई, जो अपने प्रभाव को स्थापित करने के लिए आग्रह नहीं, बल्कि कहानियों, विचारों और साझा मानवीय मूल्यों के माध्यम से संवाद करती है।

लैटिन अमेरिका, विशेषकर स्पेनिश भाषी दुनिया के दिलों तक पहुँचते हुए, भारत ने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि उसे समझा, सराहा और आत्मीयता के साथ अपनाया।

इस यादगार अध्याय के समापन के साथ एक शांत लेकिन दृढ़ विश्वास शेष रहता है कि साहित्य, संस्कृति और संवाद वे सेतु हैं, जो उन दूरियों को भी पाट सकते हैं जहाँ कभी विभाजन था। बोगोटा में, ये सेतु अब पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर स्थापित हो चुके है।

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