संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता
नई दिल्ली
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में हुआ वैश्विक साहित्यिक संवाद : फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, यूक्रेन और कतर रहे केंद्र ।
करुणा से पराक्रम तक: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में नोबेल पुरस्कार विजेता, अंतर्राष्ट्रीय संवाद और भारतीय सैन्य विरासत का संगम
नई दिल्ली | 14 जनवरी 2026: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के पांचवें दिन का शुभारंभ एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय फोकस के साथ हुआ, जब इंटरनेशनल पवैलियन में साहित्य, कूटनीति और पुस्तकों के भविष्य पर वैचारिक सत्रों का आयोजन हुआ। भारत में पोलैंड के राजदूत, हिज एक्सलेंसी श्री पियोटर स्विटाल्स्की ने अंतर- सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में साहित्य की भूमिका पर विचार व्यक्त किए, जबकि भारत में फ्रांस के राजदूत, हिज एक्सीलेंसी श्री थिएरी माथू बदलते वैश्विक पठन परिदृश्य में पुस्तकों के भविष्य पर चर्चा में शामिल हुए।
आज पुस्तक मेले में आने वाले गणमान्य अतिथियों में श्री एन. इंद्रसेना रेड्डी, माननीय राज्यपाल, त्रिपुरा, ईयू (EU) कमिश्नर श्री ब्रेवेन सिद्धार्थ, माननीय न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर, नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री विजय गोयल शामिल थे।
पुस्तकों पर वैश्विक संवाद
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर में, फ्रांस भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 के तहत फ्रेंच पैवेलियन के उद्घाटन के साथ केंद्र में रहा। नोत्र-डेम कैथेड्रल की वास्तुकला से प्रेरित और बांस का उपयोग करके बनाया गया यह पवैलियन, सृजनशीलता, स्थिरता और सांस्कृतिक संवाद का प्रतीक है। द फ्यूचर ऑफ बुक्स सत्र में भारत में फ्रांस के राजदूत एचई (HE) श्री थिएरी माथू और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक श्री युवराज मलिक ने प्रकाशन के विकसित होते परिदृश्य, पठन की आदतों में नवाचार और पुस्तक पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर बात की।
आज का एक और आकर्षण पोलैंड के राजदूत एचई (HE) पियोटर स्विटाल्स्की के साथ 'बुक्स एंड लिटरेचर पर एक संवाद' था। राजदूत ने कहा कि भारत की ही तरह पोलैंड को भी विभाजन का दंश झेलना पड़ा है। यह दोनों देशों की साहित्यिक परंपराओं की ताकत थी किउन्होंने अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान को जीवित रखा। जिसने अंततः पोलिश राज्य की मान्यता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने दो राष्ट्रों और राज्य के गठन के संबंध में उनके साझा ऐतिहासिक और सामाजिक इतिहास के बीच एक कड़ी के रूप में रबींद्रनाथ टैगोर के लेखन की भी बात की।
ऑस्ट्रिया-यूक्रेन सहयोग के अंतर्गत आयोजित आज के पैनल में ऑस्ट्रियाई लेखक वैलेरी फ्रिट्श, एंड्रियास उंटरवेगर तथा यूक्रेनी लेखक ल्युबोमिर डेरेश ने संघर्ष और अनिश्चितता के बीच साहित्य की भूमिका पर विचार साझा किए। मुर्तज़ा अली ख़ान द्वारा संचालित इस सत्र में यूक्रेन के राजदूत, हिज एक्सीलेंसी डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक का सम्मान भी किया गया, जिसमें यूरोप के देशों के बीच नवीनीकरण, जिजीविषा और संवाद को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर कतर की सांस्कृतिक विरासत के विशेषज्ञ श्री मोहम्मद अल ब्लोशी ने एक प्रस्तुति दी, जिसमें भारत और कतर के बीच सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों को उजागर किया गया।
कैलाश सत्यार्थी का युवाओं के लिए 3डी विजन
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और समाज सुधारक कैलाश सत्यार्थी ने करुणा की शक्ति पर बात करते हुए अपनी आगामी पुस्तक करुणा: द पॉवर ऑफ कम्पेशन और उनकी हाल ही में प्रकाशित आत्मकथा पर बात की। दशकों के सामाजिक जुड़ाव से आकर्षित होकर, उन्होंने करुणा गुणांक (सीक्यू) के विचार को एक महत्वपूर्ण मानव माप के रूप में पेश किया, जो बुद्धिमत्ता गुणांक (आईक्यू) और भावनात्मक गुणांक (ईक्यू) से परे है।
उन्होंने करुणा को जागरूकता, भावनात्मक जुड़ाव, भावना की गहराई और जिम्मेदारीपू्र्ण रवैये के एक क्रम के रूप में समझाया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि सीक्यू एक अमूर्त गुण नहीं है, बल्कि एक सीखने योग्य और कार्यान्वयन योग्य जीवन कौशल है।
युवा दर्शकों को संबोधित करते हुए, उन्होंने आधुनिक संबंधों की नजाकत और सहानुभूति, जिम्मेदारी और सम्मान की तत्काल आवश्यकता के बारे में बात की। जीवन के लिए अपने प्रेरणादायक 3डी मंत्र (Dream big, Discover one’s potential, and Do it now) सुझाया। युवाओं से करूणा को उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई में बदलने का आग्रह किया।
समुद्र के संरक्षक
थीम पवैलियन में आयोजित एक सत्र में गोवा की मुक्ति में भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक भूमिका और समुद्री सुरक्षा में इसकी विकसित हो रही जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। लेफ्टिनेंट जीत्वितेश सहारन ने 1961 की गोवा की मुक्ति के दौरान नौसेना के निर्णायक योगदान के बारे में बात की। ऑपरेशन चटनी को एक त्वरित और रणनीतिक नौसेना कार्रवाई बताया, जो चंद घंटों के भीतर ही पूरा हो गया था। उन्होंने इसमें भारतीय सेना की सटीकता और तैयारियों को भी रेखांकित किया।
समकालीन संदर्भ में, लेफ्टिनेंट कमांडर अनुपमा तपलियाल ने पायरेसी, तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद सहित आधुनिक समुद्री खतरों से निपटने में नौसेना की भूमिका पर बात की। उन्होंने ऑपरेशन संकल्प (2019) पर विस्तार से बात की, जो पायरेसी विरोधी गश्ती और व्यापारी जहाजों की सुरक्षा पर केंद्रित था।
एक अन्य सत्र में, मेजर जनरल जगतबीर सिंह द्वारा संचालित 1947-48 के जम्मू और कश्मीर ऑपरेशनों पर एक समूह ने स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले युद्ध के लिए परिस्थितियों पर चर्चा की। लेफ्टिनेंट जनरल जीएस कटोच ने महाराजा हरि सिंह की प्रारंभिक स्वतंत्रता की पसंद, पाकिस्तान के ऑपरेशन गुलमर्ग और विलय पत्र के हस्ताक्षर के बारे में विस्तार से बात की। जिसके कारण श्रीनगर में भारतीय सैनिकों को एयरलिफ्ट किया गया।
कर्नल अजय के रैना ने पाकिस्तान द्वारा स्टैंडस्टिल समझौते के उल्लंघन, प्रारंभिक सैन्य बाधाओं और भारतीय और गोरख यूनिट की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। पैनल ने युद्ध के प्रमुख चरणों पर भी बात की, जिसमें पुंछ, लद्दाख, स्कार्डू और ज़ोजिला की लड़ाई शामिल है, जिसने लद्दाख को सुरक्षित किया और संघर्ष की स्थायी विरासत को आकार दिया।
राष्ट्रीय विश्व पुस्तक मेला 2026 में किड्ज एक्सप्रेस, चिल्ड्रन पवैलियन के पांचवें दिन सीखने और कल्पना का एक रोचक मिश्रण देखने को मिला, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय सत्र "वन डे इन कज़ान" का आयोजन किया गया था। रूसी लेखक एलेना करिमोवा बच्चों को भारत की सीमा से दूर रूस के कज़ान शहर ले गईं। जहां कज़ान के दृश्यों, कहानियों, मौसमों और सांस्कृतिक के बारे में रोचक जानकारियां साझा की गईं। सांस्कृतिक संध्या में कार्निस लाइव ने एक शानदार प्रस्तुति दी, जिसमें ध्वनि, लय और मंच की जुगलबंदी ने मौजूद दर्शकों और श्रोताओं को अपने साथ बांध लिया।
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