संवाददाता - पवन कुमार गुप्ता
नई दिल्ली
पुस्तक लोकार्पण : राजस्थान पत्रिका के प्रमुख संपादक गुलाब कोठारी की “स्त्री की दिव्यता” नारीत्व के दिव्य स्वरूप की पड़ताल करती है
नई दिल्ली, 8 मार्च 2026: शिक्षा मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नई दिल्ली में मशहूर विचारक, लेखक और संपादक गुलाब कोठारी की पुस्तक “स्त्री की दिव्यता” का लोकार्पण किया।
“स्त्री की दिव्यता” शारीरिक आयाम से परे नारीत्व की अवधारणा की पड़ताल करती है। यह महिला को दिव्य ऊर्जा के रूप में वर्णित करती है। यह पुस्तक स्त्री और पुरुष सिद्धांतों के पूरक स्वभाव का वर्णन करती है और भारतीय दार्शनिक परंपराओं में महिलाओं की आध्यात्मिक भूमिका पर प्रकाश डालती है।
पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण वरिष्ठ पत्रकार, विचारक और इंद्रा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष, राम बहादुर राय और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति और साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा की मौजूदगी में हुआ।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेषक श्री युवराज मलिक ने लोगों का स्वागत करते हुए, भारतीय ज्ञान परंपराओं से जुड़ी रचनाओं को प्रकाशित करने और उनको बढ़ावा देने के राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के कमिटमेंट पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक एक महिला के जीवन के अलग-अलग पड़ावों के सफ़र और समाज में संस्कारों को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका को दिखाती है। महिलाओं के गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि जहाँ लोगों ने हमेशा अपने जीवन में महिलाओं के महत्व को पहचाना है, वहीं श्री गुलाब कोठारी का काम इस भूमिका में छिपी दिव्यता को खास तौर पर दिखाता है। “आधी दुनिया महिलाओं की है और आधी उनके बच्चों की,” इस पंक्ति को उद्धृत करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि महिलाएँ न सिर्फ़ निजी जीवन बल्कि पूरे समाज और राष्ट्रों के मूल्यों और दिशा को आकार देती हैं।
लोगों को संबोधित करते हुए, प्रोफ़ेसर कुमुद शर्मा ने नारीत्व और सृजन के विचार पर बात की। ‘नारी तू नारायणी’ की अवधारणा पर करते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे हिंदू धर्मग्रंथ देवियों के प्रतीक के माध्यम से महिलाओं को खुशहाली, शक्ति और ज्ञान का स्वरूप मानते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय सभ्यता की सोच ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ़ परिवारों बल्कि देश को बनाने वाली माना है और सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को गढ़ने में महिलाओं की बुनियादी भूमिका पर बल दिया है।
श्री राम बहादुर राय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पुस्तक का लोकार्पण होने के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास को बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन समाज को इस दिन के सिर्फ़ उत्सव से कहीं अधिक गहरे अर्थ की याद दिलाते हैं। उन्होंने भारतीय सोच में महिलाओं की धार्मिक और सहारा देने वाली शक्ति के तौर पर नारायणी की अवधारणा के बारे में बात की। गुलाब कोठारी के इस विचार को उद्धृत करते हुए कि “माँ ही स्वर्ग है,” उन्होंने माँ बनने, ज्ञान और स्त्रीत्व के बीच गहरे रिश्ते पर बात की और कहा कि ज्ञान और माँ एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आज़ादी से पहले से लेकर आज़ादी की लड़ाई तक और आज के समय में भी महिलाओं की दिव्यता और ताकत के उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं।
अपनी बात में गुलाब कोठारी ने पुस्तक के पीछे की प्रेरणा के बारे में बात की और युवा पीढ़ी को भारत की ज्ञान परंपरा की समझ से फिर से जोड़ने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि कैसे आजकल की शिक्षा व्यवस्था अधिकतर पुरुष-केंद्रित नज़रिए से बनी हैं और यह शिक्षा अक्सर महिलाओं के खास गुणों और ताकतों को पहचानने या सिखाने में नाकाम रहती है। शास्त्रों से प्रेरणा लेते हुए, उन्होंने स्त्री सिद्धांत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत समझ पर विचार किया, यह देखते हुए कि महिलाओं की भूमिका पारंपरिक रूप से लेने के बजाय देने से जुड़ी रही है, जो स्त्रीत्व की दिव्य भावना को दर्शाती है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि पुरुषों के अंदर का स्त्रीत्व धीरे-धीरे गायब हो रहा है, जिससे समाज में सहानुभूति और संवेदनशीलता में कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं ने लंबे समय से यह माना है कि महान पुरुषों को महिलाएं बनाती हैं, चाहे वे मां के रूप में हों या मार्गदर्शक के रूप में, फिर भी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था या सामाजिक चर्चाओं में ऐसी दृष्टि पर शायद ही कभी बल दिया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक, कुमार विक्रम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि न्यास द्वारा अपने प्रकाशन कार्यक्रम में जेंडर विमर्श को अहम स्थान दिया गया है। इस मौके पर उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि वर्तमान समय में सही रूप में जेंडर समानता बनाए रखने के लिए पुरुषों को भी अपने भीतर सुधार लाने की आवश्यकता है।
वैदिक दर्शन के जानकार और राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी वेद विज्ञान के अध्येता हैं। उनके लेखन में वेद-उपनिषद्-गीता उद्धृत हैं, मंत्र हैं तो व्यवहार जगत भी है। नई पीढ़ी को इस ज्ञान से जोड़ने के लिए पिछले चार दशक से भारतीय वाङ्मय की वैज्ञानिकता को प्रमाणित करने काे कटिबद्ध हैं। उनके लेख अकसर वेदों, उपनिषदों और भगवद गीता से प्रेरणा लेते हैं ताकि शास्त्रीय ज्ञान को आज की ज़िंदगी से जोड़ा जा सके।
श्री गुलाब कोठारी मानस, गीता विज्ञान उपनिषद, वेद विज्ञान उपनिषद, मैं ही राधा मैं ही कृष्ण, और ब्रह्म विवर्त सहित कई मशहूर किताबों के लेखक हैं। उनकी पुस्तक स्त्री देह से आगे, जिसे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत ने 2025 में प्रकाशित किया था, को भी बहुत प्रशंसा और पाठक मिले हैं।
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